इसीलिए तो उन यादों से एक विषैली बू आ रही है मुरझा गये यादों के महकते फूल, जीतना यादों को कुरेदती ... इसीलिए तो उन यादों से एक विषैली बू आ रही है मुरझा गये यादों के महकते फूल, जीत...
समेट लेती है स्वयं में उन सारे उदास लम्हों को और नहीं दिखाती आईने को। समेट लेती है स्वयं में उन सारे उदास लम्हों को और नहीं दिखाती आईने को।
कितना महफ़ूज़ है उनका जीवन, जिन पे माँ के साये साथ होते हैं। कितना महफ़ूज़ है उनका जीवन, जिन पे माँ के साये साथ होते हैं।
देर हो गयी बहुत अभी भी लम्हे बाक़ी हैं थाम लो, इन्हें तुम थाम लो। देर हो गयी बहुत अभी भी लम्हे बाक़ी हैं थाम लो, इन्हें तुम थाम लो।
जी चाहता है फिर से जी लूँ उन लम्हों को... जी चाहता है फिर से जी लूँ उन लम्हों को...